बंगलादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना संगठन निकाला आक्रोश मार्च

पूर्णिया की महिलाओं और डॉक्टरों द्वारा निकाली गई जुलूस में एक बच्ची आकर्षण का केंद्र रही। बच्ची के पहनावे एवं उसके साज सज्जा तथा वस्त्र विन्यास इस तरह किए गए थे की लोगों को एक अलग प्रकार का संदेश जाए। ऐसे तो जितने लोग थे सभी लोग काले वस्त्र पहने हुए थे। इस बच्ची को भी काला वस्त्र पहनाया गया था और इस बच्ची ने अपने पीठ पर तलवार लटका रखी थी। काली मां के पुजारी की तरह माथे पर लंबा काला टीका लगा था। गले में डॉक्टर द्वारा मरीज को चेक करने वाले आला और भारतीय तिरंगे की पहचान तिरंगानुमा चुनरी लपेटे यह लड़की संदेश दे रही थी की हम भारत की बेटी भारत से प्रेम करते हैं और अपने मेहनत और लगन के बल पर आला से चेक करने के उपरांत मरीजों की जान बचाते हैं। परंतु अगर हम सभी बेटियों पर अत्याचार होता है तो काली मां की शपथ लेकर काला टीका लगाकर उनका आशीर्वाद लेकर रानी लक्ष्मीबाई की तरह तलवार से भी यानी युद्ध भी  पापात्माओं से कर सकते हैं। इस बच्ची का नाम दिव्यांशी प्रिया है और यह यूकेजी की छात्रा है। पूरे कैंडल मार्च के दौरान 3 किलोमीटर तक यह बच्ची सिंबॉलिक रूप से निरंतर आगे चलती रही और लोगों का आकर्षण का केंद्र बनी रही।

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