बनभाग से 26 अगस्त को निकलेगा मिलाद-उन-नबी का जुलूस, रंगभूमि मैदान पहुंचेगा

केनगर। पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब के जन्मदिवस 12 रबी-उल-अव्वल को मिलाद-उन-नबी के रूप में मनाया जाता है। इसको लेकर शुक्रवार को बनभाग स्थित चिश्तिया मस्जिद में मुस्लिम समुदाय के लोगों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में पूर्णिया के मशहूर आलिम मुफ़्ती हसन रज़ा एवं मस्जिद के इमाम मुजीबुर रहमान की मौजूदगी में मिलाद-उन-नबी के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को लेकर विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में इमाम मुजीबुर रहमान ने बताया कि आगामी 26 अगस्त, बुधवार को यौमे पैदाइश-ए-नबी के अवसर पर जुलूस निकाला जाएगा। जुलूस सुबह 8:30 बजे बनभाग स्थित चिश्तिया मस्जिद से इस्लामी झंडे के साथ निकलेगा। जुलूस में शामिल लोग नबी-ए-पाक की पैदाइश की खुशी में नारे लगाते हुए पूर्णिया के रंगभूमि मैदान के लिए रवाना होंगे।

मुफ़्ती हसन रज़ा ने कहा कि नबी-ए-पाक हजरत मुहम्मद साहब की पैदाइश पूरी मानवता के लिए महत्वपूर्ण संदेश लेकर आई। उन्होंने इंसानियत, भाईचारे, समानता और इंसाफ की शिक्षा दी। उन्होंने कहा कि नबी-ए-पाक की शिक्षाओं के कारण समाज में आपसी भाईचारे की भावना मजबूत हुई तथा लोगों को एक-दूसरे के अधिकारों का सम्मान करने की सीख मिली।

उन्होंने कहा कि नबी-ए-पाक ने महिलाओं को सम्मान और अधिकार दिलाने, बच्चों के साथ बेहतर व्यवहार करने तथा विधवाओं और कमजोर वर्गों के हक की रक्षा करने पर जोर दिया। उन्होंने गुलामी और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ इंसानियत एवं न्याय का संदेश दिया। उनका संदेश केवल एक समुदाय तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरी मानवता के कल्याण और आपसी प्रेम का संदेश था।

मुफ़्ती हसन रज़ा ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि मिलाद-उन-नबी के अवसर पर केवल खुशी मनाना ही नहीं, बल्कि नबी-ए-पाक की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाना भी जरूरी है। समाज में अमन, शांति, सद्भाव, भाईचारा और इंसानियत को बढ़ावा देने के लिए सभी लोगों को मिलकर प्रयास करना चाहिए।

बैठक में जुलूस को शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित तरीके से निकालने तथा आपसी सौहार्द बनाए रखने पर भी जोर दिया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग मौजूद रहे।

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने