कामाख्या ओपी (पूर्णिया): बिहार में पूर्णिया जिले के कामाख्या ओपी क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां शराबबंदी को सफल बनाने की जिम्मेदारी निभाने वाले एक सरकारी शिक्षक को ही शराब के नशे में हंगामा करते हुए तीन अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने बताया कि कामाख्या ओपी की गश्ती टीम जब क्षेत्र में भ्रमण पर थी, तब कल्याणपुर चौक के पास कुछ लोग नशे की हालत में जोर-जोर से हंगामा कर रहे थे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चारों को मौके से ही दबोच लिया। ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट और स्थानीय पीएचसी में चिकित्सीय जांच के बाद डॉक्टरों ने इनके शराब पीने की पुष्टि की है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
पकड़े गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार की गई है:
- भोपाल कुमार: रहुआ मध्य विद्यालय के सरकारी शिक्षक (निवासी: घुसकीटोल कल्याणपुर)
- अरविंद कुमार: (निवासी: घुसकीटोल कल्याणपुर)
- टुनटुन पासवान: (निवासी: घुसकीटोल कल्याणपुर)
- मुनीर पासवान: (निवासी: जोतलखाई)
नौकरी से बर्खास्तगी तक की तलवार लटकी
इस गिरफ्तारी के बाद शिक्षक भोपाल कुमार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बिहार सरकारी सेवक नियमावली के तहत शराब के नशे में पकड़ा जाना गंभीर कदाचार माना जाता है। गिरफ्तारी के 48 घंटों के भीतर शिक्षक को निलंबित कर दिया जाएगा। विभागीय जांच में दोषी पाए जाने पर सेवा से बर्खास्तगी तक का प्रावधान है, जिसके बाद वह भविष्य में किसी भी सरकारी नौकरी के योग्य नहीं रहेंगे।
"क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने और नशामुक्ति अभियान को सफल बनाने के लिए पुलिस प्रतिबद्ध है। कामाख्या ओपी पुलिस ने छापेमारी के दौरान चार शराबियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक सरकारी शिक्षक भी शामिल है। इस तरह की सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।"
— राहुल कुमार, ओपी प्रभारी, कामाख्या
सख्त सजा का प्रावधान
बिहार मद्यनिषेध कानून के तहत, पहली बार पकड़े जाने पर जुर्माना (₹2,000 से ₹5,000) देना होता है। जुर्माना न भरने पर 30 दिनों की जेल होती है। लेकिन यदि वही व्यक्ति दोबारा नशे में पकड़ा जाता है, तो यह एक गैर-जमानती अपराध है, जिसमें कम से कम एक वर्ष की अनिवार्य जेल की सजा होती है।