पूर्णिया: विद्या विहार आवासीय विद्यालय स्थित रमेश चंद्र मिश्रा सभागार में सब हिमालयन रिसर्च इंस्टीट्यूट (SHRI) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘ज्ञान संगम लिटरेरी कल्चरल फेस्टिवल 2026’ का भव्य शुभारंभ शुक्रवार को दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। उद्घाटन समारोह में साहित्य, शिक्षा और संस्कृति जगत की कई प्रतिष्ठित हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस अवसर पर मृत्युंजय कुमार सिंह, प्रो. मणीन्द्रनाथ ठाकुर, प्रो. रत्नेश्वर मिश्र, डॉ. के. श्रीनिवास राव, प्रो. देवेंद्र कुमार चौबे, संतोष सिंह, राजेश मिश्रा, गिरिन्द्रनाथ झा, रंजीत कुमार पॉल, प्रेम कुमार मणि और पुष्यमित्र सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद थे।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. मदनेश्वर मिश्र एवं डॉ. श्यामानन्द सिंह के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई, जिससे पूरा वातावरण श्रद्धा और सम्मान से भर उठा। अतिथियों का स्वागत विद्या विहार समूह के राजेश मिश्रा, SHRI के डॉ. रमन एवं आयोजन समिति द्वारा किया गया।
विद्यालय के प्राचार्य निखिल रंजन ने स्वागत भाषण में कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों के बौद्धिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
स्वागत अभिभाषण में प्रो. मणीन्द्रनाथ ठाकुर ने पूर्णिया की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि “पूर्णिया की मिट्टी की खुशबू लोगों को दुनिया के किसी भी कोने में रहने के बावजूद अपनी जड़ों से जोड़े रखती है।”
प्रो. मदनेश्वर मिश्र की स्मृति में आयोजित विशेष सत्र की अध्यक्षता साहित्य अकादमी के पूर्व सचिव डॉ. के. श्रीनिवास राव ने की, जबकि प्रो. रत्नेश्वर मिश्र पैनल स्पीकर के रूप में उपस्थित रहे। प्रो. रत्नेश्वर मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कि साधारण परिवेश में जन्म लेकर भी जीवन भर साधारण बने रहना बड़ी उपलब्धि है।
बीज वक्ता के रूप में प्रो. देवेंद्र कुमार चौबे ने कहा कि “लेखन केवल जीवित होने का प्रमाण नहीं, बल्कि समय के सवालों का उत्तर देने की जिम्मेदारी है।” उन्होंने महान साहित्यकार फणीश्वरनाथ रेणु का उदाहरण देते हुए आंचलिक साहित्य की महत्ता पर प्रकाश डाला।
डॉ. के. श्रीनिवास राव ने सीमांचल क्षेत्र की बहुभाषी साहित्यिक परंपरा को रेखांकित करते हुए कहा कि यहां हिंदी, उर्दू और बंगला साहित्य की समृद्ध धारा रही है।
कार्यक्रम के दौरान बनैली स्टेट के कुमार श्यामानन्द सिन्हा पर जारी डाक टिकट और स्मारिका का प्रदर्शन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
सभागार परिसर में लगे पुस्तक स्टॉल दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहे, जहां राजकमल, वाणी, सेतु, प्रगतिशील, रचनाकार और अन्य प्रकाशनों की हजारों पुस्तकें प्रदर्शित की गईं।
इसके साथ ही मणिपुरी बैम्बू आर्किटेक्चर, गुल्लू गैलरी की टिंकी कुमारी की चित्रकला प्रदर्शनी, किलकारी बाल भवन की पेंटिंग्स, टेक्सटाइल आर्ट, लिप्पन पेंटिंग और विभिन्न क्राफ्ट प्रदर्शनी ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
दूसरे सत्र में कुमार श्यामानन्द सिंह की स्मृति में आयोजित संगीत संध्या में पश्चिम बंगाल की शास्त्रीय गायिका महुआ चटर्जी, सनातन गोस्वामी और शोभीक सरकार ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस आयोजन में गुलाब नारायण झा एवं प्रशांत कुमार झा (डालू स्मृति न्यास) का विशेष सहयोग रहा। वहीं स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, वीवीआईटी, वीवीआरएस, कैरियर प्लस, पावरग्रिड, INTACH, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, आईडीबीआई बैंक और जनमन फाउंडेशन ने इवेंट पार्टनर के रूप में योगदान दिया।
अंत में विद्या विहार समूह के राजेश मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रमन ने किया, जबकि स्वागत गान सुप्रिया मिश्रा एवं विद्यालय की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत किया गया।
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