पूर्णिया। बिहार की सांस्कृतिक उर्वरता और बाल प्रतिभाओं ने एक बार फिर राष्ट्रीय पटल पर अपनी चमक बिखेरी है। सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केन्द्र (CCRT) द्वारा संचालित 'सांस्कृतिक प्रतिभा खोज छात्रवृत्ति योजना' (CTSSS) के तहत इस वर्ष किलकारी बिहार बाल भवन, पूर्णिया के दो बच्चों का चयन किया गया है।
इस उपलब्धि ने जिले के कला जगत और किलकारी संस्थान में हर्ष का माहौल पैदा कर दिया है।
इन विधाओं में मिली सफलता
चयनित बच्चों में दो छात्राओं ने अपनी गायकी और साधना के दम पर यह मुकाम हासिल किया है:
- सुहानी खातून: इनका चयन लोक संगीत विधा में हुआ है। सुहानी, किलकारी पूर्णिया की प्रशिक्षिका सोनी जी के मार्गदर्शन में अपनी कला को निखार रही हैं।
- ईशा कुमारी: ईशा का चयन शास्त्रीय संगीत विधा के लिए किया गया है। वे प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीत प्रशिक्षक अमरनाथ झा से प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।
क्या है CCRT छात्रवृत्ति?
यह छात्रवृत्ति भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा 10 से 14 वर्ष की आयु के उन बच्चों को प्रदान की जाती है, जो संगीत, नृत्य, नाटक, चित्रकला और शिल्प जैसी पारंपरिक कलाओं में असाधारण प्रतिभा रखते हैं। योजना का मुख्य उद्देश्य इन नन्हे कलाकारों को आर्थिक सहयोग प्रदान कर उन्हें अपने क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने में मदद करना है।
"संस्थान के प्रशिक्षकों के समर्पण और बच्चों की कड़ी मेहनत ने इस सफलता की राह प्रशस्त की है। यह छात्रवृत्ति इन बच्चों को भविष्य में कला की नई ऊंचाइयों को छूने का अवसर प्रदान करेगी।"
— प्रबंधन, किलकारी बिहार बाल भवन
भविष्य की राह होगी सुगम
इस चयन के बाद अब सुहानी और ईशा को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से वित्तीय सहायता मिलेगी। स्थानीय स्तर पर इसे न केवल बच्चों की व्यक्तिगत सफलता, बल्कि पूर्णिया के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। प्रशिक्षकों का मानना है कि इस तरह के प्रोत्साहन से ग्रामीण और छोटे शहरों की प्रतिभाओं को अपनी जड़ों से जुड़े रहने और पेशेवर पहचान बनाने में बल मिलता है।