बिहार में प्रस्तावित पंचायत चुनाव 2026 को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के मुखिया, सरपंच और त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों ने पंचायत चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए राज्य निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले में आगामी 15 मई को आयोग में सुनवाई निर्धारित की गई है। प्रतिनिधियों का दावा है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो मामला पटना हाईकोर्ट में और गहराएगा, जिससे पंचायत चुनाव टलने की आशंका भी बढ़ सकती है।
प्रतिनिधियों का मुख्य आरोप है कि बिहार में 2022-23 का जाति आधारित सर्वे पूरा होने के बावजूद पंचायत चुनाव अब भी 1991 की जनगणना और पुराने परिसीमन के आधार पर कराने की तैयारी की जा रही है। इसे लेकर पंचायत प्रतिनिधियों ने चुनाव प्रक्रिया की वैधता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
मुखिया महासंघ के अध्यक्ष मिथिलेश राय और पंच-सरपंच संघ के अध्यक्ष आमोद निराला ने कहा कि वर्तमान परिस्थिति में चुनाव कराना न्यायसंगत नहीं होगा। उनका कहना है कि सरकार बिना सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित ‘ट्रिपल टेस्ट’ प्रक्रिया पूरी किए पंचायत चुनाव कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने यूपी पंचायत चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी इसी तरह की परिस्थितियों में चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई थी।
प्रतिनिधियों की दो प्रमुख मांगें
पंचायत प्रतिनिधियों ने राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष दो अहम मांगें रखी हैं—
- वर्ष 2022-23 के जाति आधारित सर्वे के आंकड़ों के आधार पर पंचायतों की नई आरक्षण सूची तैयार की जाए।
- नए परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने तक पंचायत चुनाव 2026 की सभी प्रक्रियाओं पर रोक लगाई जाए।
‘ट्रिपल टेस्ट’ बना सबसे बड़ा कानूनी मुद्दा
इस पूरे विवाद का केंद्र सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित ‘ट्रिपल टेस्ट’ प्रक्रिया है। स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण लागू करने से पहले इस प्रक्रिया को पूरा करना अनिवार्य माना गया है। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि बिना ट्रिपल टेस्ट के चुनाव कराए गए, तो पूरा चुनाव कानूनी विवाद में फंस सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि पुराने आंकड़ों के आधार पर ओबीसी आरक्षण देना असंवैधानिक माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में ओबीसी आरक्षित सीटों को सामान्य श्रेणी घोषित कर चुनाव कराना पड़ सकता है।
अब सबकी निगाहें 15 मई को होने वाली राज्य निर्वाचन आयोग की सुनवाई पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि इस सुनवाई के बाद बिहार पंचायत चुनाव 2026 की दिशा और स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगी।