सड़क निर्माण में देरी से मक्के की फसल पर संकट, किसानों का विरोध प्रदर्शन


केनगर/चम्पानगर:

नगर पंचायत चम्पानगर के वार्ड संख्या-12 अंतर्गत चम्पानगर से कारी कोशी नदी स्थित खररा घाट तक बन रही करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी पक्की सड़क का निर्माण कार्य अत्यंत धीमी गति से होने के कारण किसानों की परेशानी बढ़ गई है। मिर्जापुर बहियार के लगभग 5 दर्जन से अधिक किसान इस परियोजना से प्रभावित हो रहे हैं, जिनकी मक्के की तैयार फसल कटाई के अभाव में बर्बादी की कगार पर है।

किसानों का कहना है कि एक ओर बे मौसम आंधी और बारिश से वे पहले ही परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर सड़क निर्माण में हो रही देरी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। पिछले 7 महीनों में खररा घाट से मात्र 400 मीटर तक ही सड़क बन पाई है। इससे खेतों तक आवागमन बाधित हो गया है और किसान अपनी फसल की कटाई नहीं कर पा रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, जहां सड़क का निर्माण हुआ है, वहां भी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कई जगहों पर सड़क में दरारें पड़ गई हैं, और दोनों किनारों पर रेनकट की समस्या दिख रही है। किसानों का आरोप है कि सड़क ढलाई के बाद ही वह “स्प्रिंग की तरह लचकने” लगी है, जो निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इसके अलावा, जहां पुल की आवश्यकता है, वहां केवल पाइप डालकर खानापूर्ति की जा रही है।

इस समस्या को लेकर दर्जनों किसानों—जिनमें पंकज यादव, लाल मोहन यादव, मंटू यादव, वसंत यादव, पप्पू यादव, अवधेश यादव और जित्तन यादव शामिल हैं—ने निर्माण स्थल पर सामूहिक विरोध प्रदर्शन किया। किसानों ने मांग रखी कि कम से कम 15 दिनों के लिए निर्माण कार्य रोक दिया जाए, ताकि वे अपनी खड़ी मक्के की फसल की कटाई कर सकें।

किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं और फसल में अंकुरण के कारण नुकसान हुआ, तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन कर मुआवजे की मांग करेंगे।

वहीं, सड़क निर्माण कार्य के संवेदक आदित्य कुमार सिंह ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि निर्माण कार्य पूरी तरह से सरकारी मानकों के अनुरूप किया जा रहा है।

स्थिति तनावपूर्ण, समाधान की प्रतीक्षा
फिलहाल किसान और संवेदक के बीच विवाद बना हुआ है। स्थानीय प्रशासन की पहल से ही इस समस्या का समाधान निकलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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