केनगर, पूर्णिया। केनगर प्रखंड के गणेशपुर पंचायत अंतर्गत सोनगढ़ा डहरिया मौजा स्थित डहरिया गांव में बुधवार को पुलिस प्रशासन ने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कुर्की-जब्ती की कार्रवाई की। यह कार्रवाई वर्ष 1998 में दर्ज एक पुराने आपराधिक मामले में न्यायालय द्वारा जारी आदेश के आलोक में की गई।
इस दौरान पुलिस ने दो घरों में कुर्की-जब्ती की कार्रवाई करते हुए घरेलू सामान जब्त किया तथा एक अभियुक्त को गिरफ्तार कर अपने साथ थाना ले गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार यह मामला केनगर थाना कांड संख्या 136/1998 से जुड़ा है। आरोप है कि वर्ष 1998 में आदिवासी समाज के 100 से 200 लोगों की भीड़ ने हथियारों से लैस होकर एक ट्रैक्टर एवं उसके चालक पर हमला कर दिया था। बताया जाता है कि ट्रैक्टर चालक तैयफुल नदाफ रैयतदार विशेष वर्मा के खेत की जुताई करने के बाद एक पेड़ के नीचे भोजन कर रहे थे।
इसी दौरान बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंचे और चालक को एक पेड़ से बांधकर बंधक बना लिया। आरोप है कि इसके बाद ट्रैक्टर में आग लगा दी गई तथा चालक को भी आग के हवाले करने का प्रयास किया गया। हालांकि आसपास के लोगों के हस्तक्षेप से चालक को मुक्त करा लिया गया।घटना के बाद चालक तैयफुल नदाफ के आवेदन पर केनगर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
यह मामला पिछले 28 वर्षों से न्यायालय में विचाराधीन रहा। बताया जाता है कि इस दौरान न्यायालय द्वारा तीन बार कुर्की-जब्ती का समन जारी किया गया था, लेकिन कार्रवाई नहीं हो सकी। आवेदक पक्ष का कहना है कि मामले की जानकारी पत्राचार के माध्यम से राज्य सरकार तक पहुंचाई गई, जिसके बाद प्रशासन सक्रिय हुआ। इसी क्रम में दो दंडाधिकारियों (मजिस्ट्रेट) की प्रतिनियुक्ति के साथ बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष पुलिस बल को डहरिया गांव भेजा गया।
पुलिस ने दो घरों में छापेमारी कर बर्तन, चौकी, दरवाजे की केवाड़ी समेत अन्य सामान जब्त किए।कार्रवाई के दौरान पुलिस ने छक्कन मुर्मू (55 वर्ष), पिता स्वर्गीय जेठा मुर्मू, निवासी डहरिया वार्ड संख्या-10, थाना केनगर को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार अभियुक्त को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए थाना लाया गया।मामले में नामजद अभियुक्तों में संधू मुर्मू, प्रेमचंद हांसदा, संजय सोरेन, नागेश्वर मुर्मू, लाल मरांडी, सैनिक लाल हांसदा, दिना संथाल, शिबू टुडू, छोटेलाल टुडू, छक्कन मुर्मू, रामू संथाल एवं एतवारी मरांडी शामिल हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इनमें से सात अभियुक्तों को बिना मृत्यु प्रमाण पत्र के मृत घोषित कर दिया गया है, जबकि कुछ अभियुक्त वर्तमान में दिल्ली एवं पंजाब सहित अन्य राज्यों में मजदूरी कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि 28 वर्षों बाद की गई यह कार्रवाई केवल औपचारिकता प्रतीत होती है। वहीं पुलिस प्रशासन का कहना है कि न्यायालय के आदेश के अनुसार विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है। इस संबंध में सदर एसडीपीओ-2 डॉ. गौरव कुमार ने बताया कि न्यायालय के आदेश के तहत कुर्की-जब्ती का समन जारी किया गया था। आदेश के अनुपालन में दो व्यक्तियों के विरुद्ध कुर्की-जब्ती की कार्रवाई की गई है तथा एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया है।
उन्होंने कहा कि जिन सात अभियुक्तों को मृत बताया जा रहा है, उनके संबंध में वैधानिक साक्ष्य एवं आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा। पर्याप्त कानूनी प्रमाण मिलने के बाद ही उन्हें मृत माना जाएगा, अन्यथा उनके विरुद्ध भी कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में मामले को लेकर चर्चा का माहौल बना हुआ है। 28 वर्ष पुराने इस प्रकरण में न्यायालय के आदेश पर हुई कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों और प्रशासन के बीच विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
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