केनगर, पूर्णिया। केनगर प्रखंड मुख्यालय से सटे केनगर सत्संग मंदिर प्रांगण में आयोजित दो दिवसीय वार्षिक संतमत सत्संग रविवार की संध्या भक्तिमय वातावरण के बीच संपन्न हो गया। संतमत आश्रम के संत धीरेन्द्र बाबा एवं स्थानीय श्रद्धालुओं के सहयोग से आयोजित इस आध्यात्मिक महोत्सव में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म, भक्ति और आत्मज्ञान की अमृतवाणी का रसपान किया।
सत्संग के दूसरे दिन सुबह से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब सत्संग स्थल पर उमड़ पड़ा। प्रखंड सहित दूर-दराज के गांवों और विभिन्न जिलों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भजन, कीर्तन एवं आध्यात्मिक प्रवचनों के माध्यम से आत्मिक शांति और दिव्य आनंद का अनुभव किया। पूरे दिन सत्संग स्थल भक्ति-रस में डूबा रहा तथा आध्यात्मिक संगीत की मधुर ध्वनि वातावरण को भक्तिमय बनाती रही।प्रवचन के दौरान संत-महात्माओं ने मानव जीवन की महत्ता, ईश्वर प्राप्ति के मार्ग तथा गुरु की महिमा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन ईश्वर को पाने और आत्मज्ञान प्राप्त करने का सर्वोत्तम अवसर है। नियमित ध्यान, नाम-जाप, सत्संग और सदाचारपूर्ण जीवन के माध्यम से व्यक्ति सांसारिक दुखों और मोह-माया से मुक्ति प्राप्त कर सकता है। संतों ने श्रद्धालुओं से आध्यात्मिक जीवन अपनाने और मानव कल्याण के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।सत्संग में भागलपुर कुप्पाघाट संतमत आश्रम से पूज्यपाद गुरुसेवी स्वामी भगीरथ दास जी महाराज एवं स्वामी नरेशानंद जी महाराज, सहरसा जिले के महुआ संतमत आश्रम से स्वामी अरविंद दास जी महाराज, हरिद्वार संतमत आश्रम से स्वामी ज्ञान शेखर जी महाराज तथा अररिया जिले के फारबिसगंज संतमत आश्रम से स्वामी बुद्धिनाथ जी महाराज सहित अनेक संत-महात्माओं ने क्रमवार प्रवचन देकर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान किया।इस अवसर पर अखिल भारतीय संतमत समिति के सदस्य सह जदयू के प्रखंड अध्यक्ष सुबोध मेहता ने भी मंच से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए संतों द्वारा प्रदान की गई अमृतवाणी को अपने जीवन में आत्मसात करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सत्संग मनुष्य को सही दिशा प्रदान करता है तथा नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों को मजबूत बनाता है।उल्लेखनीय है कि दो दिवसीय वार्षिक संतमत सत्संग के दौरान पूरा केनगर मुख्यालय एवं आसपास का क्षेत्र मेले में तब्दील हो गया था। श्रद्धालुओं और आम लोगों की भारी भीड़ के कारण पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल बना रहा। मेले में दर्जनों नाश्ता एवं मिठाई की दुकानें सजाई गई थीं। इसके अलावा बच्चों और युवाओं के मनोरंजन के लिए विभिन्न प्रकार के झूले एवं अन्य मनोरंजन साधनों की व्यवस्था की गई थी, जिसका लोगों ने भरपूर आनंद उठाया।सत्संग मंदिर समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए ठहरने, भोजन तथा शुद्ध पेयजल की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई थी। आयोजन की सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं की लोगों ने सराहना की और इसे क्षेत्र के सबसे सफल एवं अनुकरणीय धार्मिक आयोजनों में से एक बताया। सत्संग के समापन के साथ ही श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष पुनः इसी उत्साह और श्रद्धा के साथ आयोजन में शामिल होने की कामना की।
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