केनगर, पूर्णिया। केनगर प्रखंड के जगनी पंचायत अंतर्गत सौराहा गांव स्थित माँ विषहरी मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव भक्तिमय वातावरण में जारी है। 17 जून 2026 को भव्य कलश शोभायात्रा के साथ प्रारंभ हुए इस धार्मिक आयोजन के छठे दिन मंगलवार की रात्रि श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
मंचासीन वृंदावन धाम के सुप्रसिद्ध कथावाचक कन्हैया दास जी महाराज ने रामायण के किष्किन्धा कांड एवं सुंदर कांड के महत्वपूर्ण प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने राम-हनुमान मिलन, बाली वध, लंका दहन तथा हनुमान-विभीषण संवाद की कथा सुनाते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति और धर्म के महत्व से अवगत कराया। कथा श्रवण के दौरान उपस्थित श्रद्धालु भक्ति भाव में सराबोर नजर आए।
अपने प्रवचन में महाराज ने मित्रता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि "सच्चा मित्र वही होता है, जो अपने मित्र के दुख को अपना दुख समझे और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़ा रहे।" उनके प्रेरणादायी विचारों को श्रद्धालुओं ने ध्यानपूर्वक सुना।
इस अवसर पर भागवत कथा के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले समाजसेवियों एवं जनप्रतिनिधियों को कथावाचक कन्हैया दास जी महाराज द्वारा अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में पूर्व जिला परिषद सदस्य सुनील मेहता, जगनी पंचायत के मुखिया मंगल ऋषि, जदयू प्रखंड अध्यक्ष सुबोध मेहता, पूर्व उपमुखिया मंटू कुशवाहा, स्थानीय समाजसेवी संजय कुमार सिंह, निरंजन कुशवाहा सहित कई कार्यकर्ता एवं स्वयंसेवक शामिल रहे।
कथा के अगले क्रम में महाराज ने सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन किया। इस दौरान राधा-कृष्ण का स्वरूप धारण किए कलाकारों द्वारा प्रस्तुत फूलों की होली का मनोहारी दृश्य श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना रहा। भक्तों ने भजन-कीर्तन और पुष्पवर्षा के बीच आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया।
उल्लेखनीय है कि सात दिवसीय भागवत कथा के शुभारंभ से लेकर समापन तक माँ विषहरी स्थान परिसर मेले के रूप में सज गया है। परिसर में विभिन्न प्रकार के झूले, खेल-तमाशे तथा सैकड़ों रंग-बिरंगी दुकानें लोगों को आकर्षित कर रही हैं। कथा श्रवण के बाद श्रद्धालु मेले का भी भरपूर आनंद उठा रहे हैं।
भागवत कथा एवं मेले के आयोजन से पूरे क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक उत्साह का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार इस प्रकार के आयोजनों से समाज में आध्यात्मिक चेतना, आपसी सौहार्द और सामाजिक एकता को बढ़ावा मिलता है।