बताया जा रहा है कि रजिस्ट्री के बाद सीमांकन सत्यापित नहीं होने के कारण पहले दाखिल-खारिज का आवेदन रद्द कर दिया गया था। इसके बाद कथित रूप से केवाला में छेड़छाड़ कर खेसरा बदल दिया गया और सीमांकन को पूर्ववत रखते हुए दोबारा आवेदन कर जमाबंदी कायम करा ली गई। जांच में यह भी सामने आया कि जिस दस्तावेज संख्या का उपयोग किया गया, वह किसी अन्य अंचल से संबंधित है।
यह मामला केनगर अंचल के झुन्नी इस्तमबरार पंचायत के देवीनगर मौजा (थाना संख्या-137) से जुड़ा है। इस संबंध में राजस्व अधिकारी सह प्रभारी अंचल अधिकारी भवेश कुमार सिंह ने बताया कि जमींदार बसंत कुमार चौधरी द्वारा आपत्ति दर्ज करायी गई है और नामांतरण वाद को सक्षम न्यायालय में रद्दीकरण के लिए भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि कार्रवाई कर्मचारी की रिपोर्ट के आधार पर की जाती है।
वहीं, एडीएम रवि राकेश ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में फिलहाल नहीं है, लेकिन यदि ऐसा मामला सामने आता है तो इसकी गहन जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जमींदार बसंत कुमार चौधरी के अनुसार, उन्होंने दस्तावेज संख्या 2224 दिनांक 14 फरवरी 2020 के माध्यम से तीन व्यक्तियों के नाम जमीन बेची थी। इस जमीन के दाखिल-खारिज के लिए केस नंबर 7322/19-20 के तहत आवेदन किया गया था, जिसे 24 मार्च 2021 को तत्कालीन अंचल पदाधिकारी द्वारा खारिज कर दिया गया था। कारण बताया गया कि केवाला में दर्ज खेसरा और सीमांकन में विरोधाभास है।
इसके बाद कथित रूप से केवाला में छेड़छाड़ कर खेसरा बदल दिया गया और दस्तावेज संख्या 2224 की जगह 2124 दर्शाते हुए केस नंबर 559/25-26 के तहत दोबारा आवेदन किया गया। इस बार केवल एक व्यक्ति को खरीदार दिखाया गया और जमाबंदी कायम कर दी गई।
बाद में जांच में यह सामने आया कि दस्तावेज संख्या 2124 वास्तव में पूर्णिया पूर्व अंचल के महाराजगंज क्षेत्र से संबंधित है और केनगर अंचल में इस नंबर पर कोई रजिस्ट्री हुई ही नहीं है। इसके बाद जमींदार ने संबंधित दस्तावेजों के साथ अंचल कार्यालय में आपत्ति दर्ज करायी।