ग्रामीणों का कहना है कि हरिदास टोला, कल्याणपुर, गोरे लाल टोला और गोठ मजरा जैसे क्षेत्रों में अनुसूचित जाति के हजारों लोग कई पीढ़ियों से निवास करते आ रहे हैं। इसके बावजूद सूची में उनकी संख्या शून्य दिखाया जाना गंभीर लापरवाही का मामला है।
इस संबंध में ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने बीते 12 मई को ही प्रखंड विकास पदाधिकारी केनगर को लिखित आवेदन देकर मामले की जांच कर जनगणना में छूटे लोगों के नाम जोड़ने की मांग की थी। इसके बाद प्रशासन द्वारा 18 मई को आपत्ति एवं दावा की जनसुनवाई की तिथि निर्धारित की गई थी।
निर्धारित तिथि के अनुसार रविवार को मजरा पंचायत से दर्जनों ग्रामीण प्रखंड कार्यालय पहुंचे और जनसुनवाई में अपनी बात रखते हुए सूची में सुधार की मांग की। ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर वास्तविक आंकड़ों को शामिल करने की अपील की।
वहीं इस मामले पर प्रखंड विकास पदाधिकारी आशीष कुमार ने बताया कि वर्तमान में जारी की गई सूची वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि जनसुनवाई के दौरान सभी तथ्यों और ग्रामीणों की आपत्तियों को गंभीरता से सुना गया है तथा मामले की जांच कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अब देखना होगा कि प्रशासनिक जांच के बाद निर्वाचन सूची में सुधार होता है या नहीं, क्योंकि यह मामला पंचायत चुनाव में प्रतिनिधित्व और आरक्षण व्यवस्था से भी सीधे जुड़ा हुआ माना जा रहा है।