मजरा पंचायत में निर्वाचन सूची पर बवाल, अनुसूचित जाति की संख्या शून्य दिखाने पर ग्रामीणों ने जताई आपत्ति

केनगर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत पंचायत सरकार भवन मजरा में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 को लेकर जारी प्रादेशिक निर्वाचन सूची को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। एक सप्ताह पूर्व पंचायत सरकार भवन में चस्पा की गई निर्वाचन सूची में कुछ वार्डों में अनुसूचित जाति की जनसंख्या को शून्य (0) दर्शाए जाने से स्थानीय अनुसूचित जाति परिवारों में भारी असंतोष व्याप्त है।

इस त्रुटि के विरोध में पंचायत के पूर्व पैक्स अध्यक्ष प्रकाश कुमार भारती के नेतृत्व में सैकड़ों अनुसूचित जाति परिवारों ने संयुक्त रूप से प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) केनगर को आवेदन सौंपकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सूची में पंचायत के कई वार्डों की वास्तविक स्थिति को नजरअंदाज किया गया है, जिससे समुदाय के लोगों में नाराजगी बढ़ गई है।

ग्रामीणों द्वारा दिए गए आवेदन में उल्लेख किया गया है कि पंचायत सरकार भवन में चस्पा की गई सूची में वार्ड संख्या 1 से 5 तथा वार्ड संख्या 10 और 13 में अनुसूचित जाति की आबादी को पूरी तरह शून्य दिखाया गया है, जबकि यह वास्तविक स्थिति से बिल्कुल अलग है।

ग्रामीणों का कहना है कि हरिदास टोला, कल्याणपुर, गोरे लाल टोला और गोठ मजरा जैसे क्षेत्रों में अनुसूचित जाति के हजारों लोग कई पीढ़ियों से निवास करते आ रहे हैं। इसके बावजूद सूची में उनकी संख्या शून्य दिखाया जाना गंभीर लापरवाही का मामला है।

इस संबंध में ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने बीते 12 मई को ही प्रखंड विकास पदाधिकारी केनगर को लिखित आवेदन देकर मामले की जांच कर जनगणना में छूटे लोगों के नाम जोड़ने की मांग की थी। इसके बाद प्रशासन द्वारा 18 मई को आपत्ति एवं दावा की जनसुनवाई की तिथि निर्धारित की गई थी।

निर्धारित तिथि के अनुसार रविवार को मजरा पंचायत से दर्जनों ग्रामीण प्रखंड कार्यालय पहुंचे और जनसुनवाई में अपनी बात रखते हुए सूची में सुधार की मांग की। ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर वास्तविक आंकड़ों को शामिल करने की अपील की।

वहीं इस मामले पर प्रखंड विकास पदाधिकारी आशीष कुमार ने बताया कि वर्तमान में जारी की गई सूची वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि जनसुनवाई के दौरान सभी तथ्यों और ग्रामीणों की आपत्तियों को गंभीरता से सुना गया है तथा मामले की जांच कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

अब देखना होगा कि प्रशासनिक जांच के बाद निर्वाचन सूची में सुधार होता है या नहीं, क्योंकि यह मामला पंचायत चुनाव में प्रतिनिधित्व और आरक्षण व्यवस्था से भी सीधे जुड़ा हुआ माना जा रहा है।

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