पूर्णिया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य ने देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों, बढ़ती बेरोजगारी और युवाओं की खराब होती स्थिति को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि वर्ष 2014 के बाद देश में पेपर लीक एक “संगठित उद्योग” का रूप ले चुका है, जिसने लाखों मेहनती और गरीब छात्रों के सपनों को तोड़ दिया है।
उन्होंने कहा कि गांव और कस्बों से आने वाले छात्र सीमित संसाधनों में दिन-रात मेहनत कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक हो जाने से उनका भविष्य अधर में लटक जाता है। कई परीक्षाएं रद्द हो जाती हैं, जिससे छात्रों का समय, पैसा और मानसिक संतुलन तक प्रभावित होता है। अनेक अभ्यर्थियों की उम्र सीमा समाप्त हो जाती है और परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है।
ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में , , , तथा जैसी कई महत्वपूर्ण परीक्षाएं पेपर लीक और धांधली के आरोपों के कारण रद्द करनी पड़ीं। इससे करोड़ों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस गंभीर समस्या पर केवल औपचारिक कार्रवाई करती है, लेकिन उसका जमीनी असर दिखाई नहीं देता। उन्होंने कहा कि कई मामलों में सरकारी तंत्र, परीक्षा एजेंसियों और प्रभावशाली लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह नहीं बनेगी, तब तक युवाओं को न्याय नहीं मिल पाएगा।
केंद्र सरकार और पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि देश के छात्र-नौजवान रोजगार और परीक्षा व्यवस्था को लेकर परेशान हैं, जबकि सरकार जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने में लगी हुई है। आज किसान, मजदूर, गरीब और मध्यम वर्ग महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट से जूझ रहा है।
अंत में ने मांग की कि पेपर लीक को “राष्ट्रविरोधी अपराध” घोषित कर इसके खिलाफ कठोर और प्रभावी कानून बनाया जाए। साथ ही दोषियों की संपत्ति जब्त कर फास्ट ट्रैक अदालतों में मुकदमा चलाने की मांग की, ताकि देश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित रह सके।