जिलाधिकारी अंशुल कुमार की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग की मासिक समीक्षा बैठक, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधार पर विशेष जोर

पूर्णिया। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से बुधवार को केनगर प्रखंड स्थित सद्भावना सभागार में जिलाधिकारी श्री अंशुल कुमार (भा.प्र.से.) की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग की मासिक समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता तथा जिले के प्रमुख स्वास्थ्य सूचकांकों की विस्तार से समीक्षा की गई।
बैठक में सिविल सर्जन डॉ. प्रमोद कुमार कनौजिया, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी (DIO), जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी (VBDCO), जिला गैर-संचारी रोग पदाधिकारी (NCDO), जिला संचारी रोग पदाधिकारी (CDO), राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के उपाधीक्षक, जिला स्वास्थ्य समिति के सभी कार्यक्रम पदाधिकारी, सलाहकार एवं कर्मी, यूनिसेफ और पिरामल फाउंडेशन के जिला प्रतिनिधि सहित जिले के सभी प्रखंडों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, अस्पताल प्रबंधक (HM), प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक (BHM) एवं प्रखंड सामुदायिक समन्वयक (BCM) उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने HMIS (नीति आयोग सूचकांक सहित), नियमित टीकाकरण, परिवार नियोजन, एम्बुलेंस सेवा, औषधि उपलब्धता, OPD/IPD सेवाएं, ई-संजीवनी, टीबी एवं एनसीडी सहित राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों, आशा कार्यक्रम, पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) तथा भाव्या पोर्टल की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की।
समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के तहत सभी गर्भवती महिलाओं की गुणवत्तापूर्ण एएनसी जांच सुनिश्चित करने, गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उनका समुचित उपचार कराने तथा सभी पात्र गर्भवती महिलाओं का शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि जिन प्रखंडों में संस्थागत प्रसव की उपलब्धि 40 प्रतिशत से कम है, वहां संचालित निजी स्वास्थ्य संस्थानों की गुणवत्ता जांच के लिए सिविल सर्जन टीम गठित कर जांच कराएं। साथ ही सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी एवं बीसीएम को अपने-अपने क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव की संख्या बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि पिछले तीन माह में एक या दो से कम संस्थागत प्रसव कराने वाली आशा कार्यकर्ताओं से कारण पूछा जाए तथा सुधार नहीं होने पर चयनमुक्ति का प्रस्ताव जिला कार्यालय भेजा जाए। नियमित टीकाकरण में कमजोर प्रदर्शन करने वाली आशा कार्यकर्ताओं के विरुद्ध भी आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया।

वहीं पिछले तीन माह में संस्थागत प्रसव, नियमित टीकाकरण एवं अन्य स्वास्थ्य सूचकांकों पर उत्कृष्ट कार्य करने वाली आशा कार्यकर्ताओं को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित करने के लिए उनके नाम प्रस्तावित करने का निर्देश भी दिया गया। इसके अलावा सभी प्रखंडों में रिक्त पड़े आशा पदों पर 15 दिनों के भीतर चयन प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया।

बैठक में स्वास्थ्य संस्थानों में खराब पड़े उपकरणों की सूची शीघ्र जिला मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए गए, ताकि उनकी मरम्मत एवं आवश्यक प्रतिस्थापन की कार्रवाई समय पर की जा सके।

टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने एक्स-रे, NAAT जांच, टीबी मरीजों की अधिसूचना, Differentiated TB Care, TPT, निक्षय मित्र, फूड बास्केट वितरण तथा निक्षय पोषण योजना (NPY) के भुगतान में गुणात्मक सुधार लाने एवं सभी निर्धारित लक्ष्यों की शत-प्रतिशत उपलब्धि सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

एचपीवी (HPV) टीकाकरण की समीक्षा करते हुए उन्होंने निर्देश दिया कि दूसरी डोज से वंचित सभी पात्र छात्राओं का विद्यालय स्तर पर विशेष अभियान चलाकर शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग आपसी समन्वय के साथ विद्यालयवार कार्ययोजना तैयार कर अभियान संचालित करेंगे।

बैठक में राज्य स्तर पर संचालित होने वाले गैर-संचारी रोग (NCD) मेगा ड्राइव की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने प्रखंडवार माइक्रोप्लान, आयुष्मान आरोग्य मंदिर सहित सभी स्वास्थ्य संस्थानों में एनसीडी जांच के लिए आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता तथा निर्धारित लक्ष्यों की स्थिति का जायजा लेते हुए सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, बीएचएम एवं बीसीएम को समयबद्ध तैयारी पूरी करने और माइक्रोप्लान के अनुरूप अभियान का सफल संचालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

बैठक के अंत में जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने कहा कि सभी स्वास्थ्य कार्यक्रमों के निर्धारित लक्ष्यों की समयबद्ध प्राप्ति, नियमित अनुश्रवण तथा प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि जिले के स्वास्थ्य सूचकांकों में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सके। वहीं सिविल सर्जन डॉ. प्रमोद कुमार कनौजिया ने सभी प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों को बैठक में दिए गए निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने एवं नियमित रूप से प्रगति प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

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