केनगर आपूर्ति कार्यालय की कार्यशैली पर उठे सवाल, राशन कार्ड के लिए महीनों से भटक रहे लाभुक; रिश्वत मांगने का भी आरोप

केनगर (पूर्णिया)। केनगर प्रखंड स्थित आपूर्ति कार्यालय की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कार्यालय के अधिकांश समय बंद रहने, अधिकारियों के अनुपस्थित रहने तथा लाभुकों के कार्य समय पर नहीं होने से दूर-दराज के गांवों से आने वाले लोग भारी परेशानी झेल रहे हैं। राशन कार्ड बनवाने, नाम जोड़ने, नाम हटाने और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए लोग महीनों से कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।

एक साल से लगा रहे कार्यालय का चक्कर

रहुआ पंचायत निवासी नीरज कुमार यादव ने बताया कि वे पिछले करीब एक वर्ष से लगातार 20 से 25 किलोमीटर की दूरी तय कर प्रखंड आपूर्ति कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन न तो प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (एमओ) मिलते हैं और न ही उनके अधीनस्थ कर्मचारी। कई बार आने-जाने के बावजूद उनका राशन कार्ड नहीं बन सका।

₹4 हजार रिश्वत मांगने का आरोप

पीड़ित नीरज कुमार यादव ने आरोप लगाया कि निराश होकर उन्होंने वार्ड संख्या-9 के सदस्य मनोज यादव से संपर्क किया। उनके अनुसार, राशन कार्ड बनवाने के नाम पर उनसे ₹4,000 की मांग की गई। पैसे देने के बाद केवल ऑनलाइन आवेदन की रिसीविंग थमा दी गई और आश्वासन दिया गया कि जल्द ही राशन कार्ड बन जाएगा।

पीड़ित का आरोप है कि उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि "एमओ साहब को खर्चा-पानी मिल गया है, अब यह रिसीविंग दिखा देना, राशन कार्ड मिल जाएगा।" लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी उनका कार्य पूरा नहीं हुआ।

'10 बजे लेट, 4 बजे भेंट नहीं' जैसी स्थिति

ग्रामीणों का आरोप है कि कार्यालय की स्थिति ऐसी हो गई है कि सुबह निर्धारित समय पर कार्यालय नहीं खुलता और शाम होने से पहले ही अधिकारी-कर्मचारी गायब हो जाते हैं। कई बार तो कार्यालय में ताला लटका रहता है। जब कभी ऑपरेटर मिलते भी हैं तो वे यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि "एमओ साहब नहीं हैं, उनके आने पर ही काम होगा।"

दर्जनों लाभुक परेशान

केवल नीरज कुमार ही नहीं, बल्कि विभिन्न पंचायतों से आए कई लाभुक पिछले छह महीने से लेकर एक वर्ष तक से कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से शबनम खातून (गोकुलपुर), जानकी कुमारी (गणेशपुर), आयशा खातून (गोकुलपुर), शेफाली कुमारी (चूनापुर), सला खातून (सौराहा), वंदना देवी (चूनापुर), कविता देवी (चूनापुर), रवीना खातून (बनभाग), कोशीदा खातून (जगनी), हंसो खातून (गोकुलपुर), अमीना खातून (बनभाग), रहना खातून (सबूतर), जसू कुमारी (बनियापट्टी), विभा देवी (काझा बनियापट्टी), अनुषा खातून (गोकुलपुर) तथा लक्ष्मी देवी (परोड़ा पंचायत) शामिल हैं।

इन सभी का कहना है कि राशन कार्ड से संबंधित कार्यों के लिए वे बार-बार कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन हर बार उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है।

एमओ ने कहा— मामले की होगी जांच

इस संबंध में जब प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी आतिश कुमार सिन्हा से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कहा,

"मैं विभागीय कार्य से मीटिंग में व्यस्त हूं। मीटिंग समाप्त होने के बाद ही इस संबंध में विस्तृत जानकारी दे पाऊंगा। अभी मामले की जानकारी मिली है। यदि शिकायत मिली है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।"

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, कार्यालय में नियमित रूप से अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा राशन कार्ड से जुड़े लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन कराने की मांग की है। साथ ही रिश्वत मांगने के आरोपों की भी स्वतंत्र जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठाई है।

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