आर्थिक तंगी के बीच महिला ने चुना आत्मनिर्भरता का रास्ता, सुबह से शाम तक टोटो चलाकर कर रही परिवार का भरण-पोषण
केनगर (पूर्णिया)। आज के दौर में महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। इसका जीवंत उदाहरण केनगर प्रखंड क्षेत्र के जगनी पंचायत अंतर्गत जगनी-बी गांव की रहने वाली डोली कुमारी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने और पति के बीमार पड़ने के बाद डोली ने मजबूरी के आगे हार मानने के बजाय खुद टोटो की कमान संभाल ली। अब वह सुबह से शाम तक टोटो चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं।
डोली कुमारी ने बताया कि उनके परिवार में दो पुत्र और तीन पुत्रियां हैं। वर्ष 2024 में उनके पति विकास कुमार मेहता, जो टोटो चलाकर परिवार का खर्च चलाते थे, अचानक बीमार पड़ गए। पति के बीमार होने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी। इसी बीच उनके एक पुत्र को भी नस से संबंधित समस्या हो गई, जिसके इलाज में काफी पैसे खर्च होने लगे। परिवार के पास घर के अलावा कोई विशेष संपत्ति या आय का साधन नहीं था।
उन्होंने बताया कि किसी तरह स्वयं सहायता समूह से लोन लेकर टोटो खरीदा गया था। पति टोटो चलाकर लोन की किस्त चुकाने के साथ-साथ घर-परिवार का खर्च चलाते थे। लेकिन पति के बीमार पड़ने और बेटे के इलाज की जरूरत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट गहरा गया।
दूसरे चालक से टोटो चलवाया, लेकिन नहीं सुधरी स्थिति
डोली के मुताबिक, परिवार की आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए उनके पति कमाई करने पंजाब चले गए। इधर, टोटो को करीब 200 रुपये प्रतिदिन पर दूसरे चालक से चलवाने लगीं। लेकिन दूसरे चालक केवल टोटो चलाने पर ध्यान देते थे और वाहन के रखरखाव एवं मेंटेनेंस पर ध्यान नहीं देते थे। इससे धीरे-धीरे टोटो की स्थिति जर्जर होने लगी और परिवार की आर्थिक स्थिति में भी कोई खास सुधार नहीं हुआ।
इसके बाद डोली ने खुद टोटो चलाने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि जब उनके पति घर पर रहकर टोटो चलाते थे, उस दौरान उनके साथ रहते हुए उन्होंने टोटो चलाने के कुछ गुर सीख लिए थे। उन्हीं अनुभवों को आधार बनाकर उन्होंने स्वयं टोटो चलाने की शुरुआत कर दी।
जगनी से चम्पानगर और गोकुलपुर तक चलाती हैं टोटो
डोली अब अपने गांव जगनी से चम्पानगर बाजार, गोकुलपुर सहित करीब 10 किलोमीटर के स्थानीय क्षेत्र में टोटो चलाती हैं। शुरुआत में महिला के टोटो चलाने को लेकर सामाजिक स्तर पर कुछ लोगों ने दबे जुबान चर्चा भी की, लेकिन डोली ने इसकी परवाह किए बिना अपना काम जारी रखा।
उन्होंने बताया कि महिला के टोटो चलाने की जानकारी मिलने के बाद तत्कालीन चम्पानगर थानाध्यक्ष ने उन्हें थाने बुलाकर सम्मानित किया। इसके बाद लोगों का नजरिया भी बदला और सामाजिक स्तर पर उन्हें सहयोग मिलने लगा।
जीविका और आशा दीदियों को भी देती हैं सेवा
डोली कुमारी ने बताया कि वह प्रतिदिन सुबह करीब 9 बजे से शाम 4 बजे तक टोटो चलाती हैं। जीविका दीदियों और आशा दीदियों का फोन आने पर उन्हें लेकर केनगर प्रखंड मुख्यालय तक भी जाती हैं। इससे उन्हें कुछ अतिरिक्त आमदनी हो जाती है और परिवार के खर्च में मदद मिलती है।
हालांकि, डोली का कहना है कि वह रात के समय किसी भी परिस्थिति में टोटो लेकर नहीं निकलती हैं। उनका कहना है कि परिवार की जिम्मेदारियों के साथ अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है।
सरकार से सहयोग की उम्मीद
डोली कुमारी ने बताया कि अभी तक उन्हें सरकार की ओर से किसी प्रकार का विशेष सहयोग नहीं मिला है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी परिस्थिति को देखते हुए सहयोग करेगी, ताकि वह अपने परिवार को बेहतर तरीके से संभाल सकें और आगे भी आत्मनिर्भर बनी रह सकें।
पति की बीमारी, बेटे के इलाज और आर्थिक तंगी के बीच डोली कुमारी का टोटो चलाने का फैसला न सिर्फ उनके परिवार के लिए सहारा बना है, बल्कि यह उन महिलाओं के लिए भी प्रेरणा है जो विपरीत परिस्थितियों में हिम्मत हार जाती हैं। डोली ने साबित किया है कि मजबूरी को अगर हौसले में बदला जाए तो आत्मनिर्भरता की राह खुद बनाई जा सकती है।